राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर कुछ लोगो मे यह भ्रांति है कि यह सिर्फ हिन्दू राष्ट्र की संकुचित मानसिकता वाला संगठन है, अपितु संघ के हिन्दू राष्ट्र में सम्पूर्ण राष्ट्रीयता का उद्बोधन होता है, ना कि किसी धर्म, जाति या संप्रदाय विशेष के प्रति। उक्त विचार राजस्थान के महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र ने रविवार को डीएवी पीजी काॅलेज में राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में ‘राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: भ्रान्तियाॅ और प्रभावकारिता‘ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा अनुदानित संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए महामहिम राज्यपाल ने कहा कि संघ को किसी भी धर्म से कोई दुर्भावना नही है, बल्कि अश्पृश्यता जैसे अभिशाप से समाज को दूर करने की सोच वाली विचारधारा का नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। समारोह को सम्बोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि हम भारत भूमि को माॅ के समान मानते है, यह सिर्फ एक भूभाग नही है। उन्हांेने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या देश पर आया कोई भी संकट हो, संघ के कार्यकर्ता सदैव सराहनीय भूमिका में सक्रिय रहते है। देश के वर्तमान हालात में इस विषय पर व्यापक चिन्तन और संघ के सन्दर्भ में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। संविधान में निहित कर्तव्यों और अधिकारों का पालन कराना भी संघ के कार्यकर्ताओं का दायित्व है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना स्वदेशी के उद्घोष से हुआ था लेकिन इसका अर्थ यह नही की संघ आधुनिकता से परहेज करता है।

विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं धर्माथ कार्य राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसकी संस्कृति होती है, उसी संस्कृति की रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रतिबद्ध है। इसी सोच को लेकर डाॅ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। इस संगोष्ठी के जरिये संघ के सम्बन्ध में फैली भ्रांतियाॅ दूर हुई है। अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. आर.पी पाठक ने कहा कि उत्तर भारत में संघ के प्रसार का श्रेय पं. दीनदयाल उपाध्याय को जाता है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक नाना जी देशमुख के कार्य सिद्धान्तों में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की पूर्ण झलक दिखलाई पड़ती है।
स्वागत भाषण देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि संघ एक संस्कार शाला है, जहाॅ उच्च आदर्शो को जीने की कला सिखलाई जाती है। सेवा भाव का दूसरा नाम संघ है।
इससे पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती के प्रतिमा पर माल्र्यापण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी के प्रारम्भ में महामहिम राज्यपाल ने उपस्थित समस्त जनों को संविधान की शपथ दिलायी। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डाॅ. सत्यदेव सिंह एवं मंत्री/प्रबन्धक अजीत कुमार सिंह ने पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया। संगोष्ठी रिर्पोट संयोजक डाॅ. शिव बहादुर सिंह, संचालन डाॅ. प्रियंका सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. समीर कुमार पाठक ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. प्रदीप कुमार सेन, डाॅ. अवधेश कुमार मिश्रा,  डाॅ. विमल शंकर सिंह, डाॅ. प्रदीप कमल, डाॅ. राकेश कुमार द्विवेदी, डाॅ. संगीता जैन, डाॅ. सुषमा मिश्रा आदि उपस्थित रही।