Teachers

Prof. Rakesh Kumar Ram
Qualification :MA, Ph. D
Designation :Head & Professor
Specialization of Subjects :Dalit Sahitya
Email :rakeshkumardav.vns@gmail.com
Prof. Samir Kumar Pathak
Qualification :MA, Ph.D
Designation : Professor
Specialization of Subjects :Hindi Navjagaran & Hindi Alochana
Email :samirbababanaras@gmail.com
Prof. Rakesh Kumar Dwivedi
Qualification :M.A. ,D.Phil
Designation :Professor & Ex. Head
Specialization of Subjects :Hindi Poetry (Muktibodh Ka Kavya Sahitya)
Email :rakeshbhu13@gmail.com
Asmita tiwari_hindi
Dr. Asmita Tiwari
Qualification :Ph.D.
Designation :Assistant Professor
Specialization of Subjects :Hindi Navjagaran
Email :asmitat8@gmail.com

Department Information

  • UG (B.A.)
  • PG (M.A.)
  • Ph.D
डीएवी पी जी कॉलेज, वाराणसी में रचनात्मक लेखन के अल्पकालिक पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया गया। अतिथियों ने भाषा की सृजनात्मक सम्भावनाओं पर साझा संवाद किया । कोई भी भाषा आपके  विकास में बाधक नही बन सकती है, बशर्ते अपने दिल की भाषा का चुनाव करे। उक्त बातें बुधवार को वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक के सत्यनारायण ने डीएवी पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम सह रचनात्मक लेखन कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही। आईजी जोन के सत्यनारायण ने कहा कि जब हम अपने अंतरात्मा की आवाज पर रास्ता चुनते है तो हमे आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता है। इस समाज मे आपके लिए कोई प्रतिस्पर्धा नही है, बस हमे सामने देखना है। खुले विचारों के साथ जिये और चुनौतियों को अवसर के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने यह भी कहा कि सिविल सेवा में हिन्दी माध्यम और हिन्दी साहित्य दोनों में काफी अवसर है। के सत्यनारायण ने प्रतिभागियों को अनुवाद कर्म की बारीकियां बताई और सृजन परिदृश्य पर बात की। अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के डॉ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि विद्यार्थी जीवन मे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगन की आवश्यकता होती है। रचनात्मक लेखन में प्रवीणता लानी है तो किताबो से दोस्ती करे और छोटी – छोटी कविता, कहानियां लिखने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि हिंदी विभाग ने मेरे संकल्प को मजबूती दी है और बेहतर कोशिश के लिए यह पहल की है। मेरी शुभकामना है कि यह प्रशिक्षण शिविर रचनात्मक नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।विशिष्ट वक्ता महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ के हिन्दी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के प्रोफेसर राजमुनि ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अंदर एक प्रतिभा अवश्य होती है, हमे उस हुनर को पहचान कर आगे बढ़ना है। इस जीवन मे असंभव जैसा कुछ नही है। कार्यक्रम के शुभारंभ में बीज वक्तव्य देते हुए प्रो राकेश कुमार राम ने लेखन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य और प्रस्तावित विन्दुओं की सिलसिलेवार चर्चा की। उन्होंने प्रस्तावित कोर्स के महत्त्व को बताते हुए कहा कि हमारी कोशिश रचनात्मक प्रतिभाओं की सृजनात्मकता को संवारना है। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत प्रोफेसर सत्यगोपाल जी ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया। डॉ. राकेश कुमार द्विवेदी ने केदारनाथ सिंह की कविता ‘धानो का गीत’ प्रस्तुत किया। संचालन प्रोफेसर समीर कुमार पाठक एवं स्वागत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राकेश कुमार राम ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. मिश्रीलाल, डॉ हसन बानो, डॉ संजय कुमार सिंह,प्रो.विक्रमादित्य राय, प्रो.विनोद कुमार चौधरी, प्रो. प्रशांत कश्यप, डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. इंद्रजीत मिश्रा, डॉ. अस्मिता तिवारी, डॉ. विश्वमौली, डॉ. नीलम सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में अध्यापक एवं छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे। हिंदी विभाग के छात्रों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की।
माँ मैं कविताएं अच्छी लिखने लगा हूं, टीचर कहते है मैं आगे जाकर टैगोर जैसा कवि बन सकता हूँ, मुझे टैगोर बनना है माँ, मुझे और पढ़ना है। बेटा… आगे पढ़ना है तो अपने पापा से पूछ, मुझसे नही और टैगोर बनने से पेट नही भरता है। उक्त भावपूर्ण दृश्य शनिवार को जीवन्त रहा डीएवी पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एकल नाट्य “माँ मुझे टैगोर  बना दे” की प्रस्तुति के अवसर पर। जम्मू से आये प्रख्यात रंगकर्मी लक्की गुप्ता ने पंजाब के मशहूर कथाकार मोहन भंडारी द्वारा रचित नाटक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे देख हॉल में उपस्थित सभी की आँखे भर आयी। नाटक में एक बच्चे की कहानी को बड़े ही मार्मिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है जिसके शिक्षक उसकी प्रतिभा देख उसे टैगोर जैसा कवि बनने की उम्मीद करते है। बच्चा भी मुफलिसी में जीने के बावजूद किसी तरह दसवीं पास कर लेता है लेकिन 12 वीं की पढ़ाई के लिए उसे आगे दूसरे शहर जाना है और उसके लिए उसके परिवार की माली हालत साथ नही देती। फिर भी पिता किसी तरह उसके पढ़ाई का इंतजाम करता है लेकिन दुर्भाग्य वश पढ़ाई के दौरान ही उसके पिता की मजदूरी करते वक़्त हादसे में मौत हो जाती है और बच्चे की पढ़ाई अधूरी रह जाती है, क्योंकि अब उसे पढ़ाई नही करनी अब उसे घर चलाने के लिए काम करना होगा। एकल नाटक में रंगकर्मी लक्की गुप्ता के भाव और संवाद ने लोगों को द्रवित कर दिया तो खूब तालियां भी बटोरी। पिछले दस वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में नाटक की प्रस्तुति दे रहे लक्की गुप्ता की यह 1096 वीं प्रस्तुति थी। इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राकेश कुमार राम एवं सांस्कृतिक समिति के समन्वयक प्रोफेसर अनूप कुमार मिश्रा ने लक्की गुप्ता को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर उनका स्वागत किया। एकल अभिनय कार्यक्रम का संयोजन प्रोफेसर समीर कुमार पाठक ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राकेश कुमार द्विवेदी ने दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रोफेसर मिश्री लाल, प्रोफेसर ऋचारानी यादव, डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. संजय कुमार सिंह, प्रोफेसर पूनम सिंह, डॉ. संगीता जैन, डॉ. मीनू लाकड़ा, डॉ. हसन बनो, डॉ. अस्मिता तिवारी, डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. सुषमा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में अध्यापक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। 
प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर हिंदी विभाग, डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र समूह द्वारा आयोजित प्रेमचन्द के गांव लमही भ्रमण और प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ विषयक चर्चा में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार राम के नेतृत्व में साहित्य अनुरागी अध्यापकों और विद्यार्थियों के समूह ने प्रेमचन्द की स्मृति में उनके घर और गांव का भ्रमण किया और रचनात्मक सम्वाद के मार्फ़त प्रेमचन्द की महत्ता का स्मरण किया।
आज की चर्चा में विद्यार्थियों के समूह ने ग्रामीण जनों से बात करके प्रेमचन्द की साहित्यिक प्रतिछवियों की पड़ताल की और प्रेमचन्द की स्मृति पर सार्थक चर्चा आयोजित की। चर्चा की शुरुआत करते हुए डीएवी पी जी कॉलेज छात्र अध्ययन समूह छात्रों ने प्रेमचन्द को आज के समय समाज के आलोक में समझने समझाने की जरूरत पर बल दिया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों जनों के साथ कठपुतली नृत्य के माध्यम से प्रेमचन्द की कलात्मक प्रस्तुति का लुत्फ लिया। प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ विषयक चर्चा में सभी विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ राकेश कुमार राम ने कहा कि प्रेमचन्द को याद करना आज के दौर में सामाजिक विषमता और आर्थिक संकट से जूझ रहे मध्यवर्ग के संघर्ष को याद करना है। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रेमचन्द जातीय उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले लेखक हैं इसलिए उनकी चेतना को आज के संदर्भ में विचार करने की जरूरत है।
चर्चा में शामिल उदित त्रिपाठी , आदित्य शुक्ल , दीपक कुमार राय ने प्रेमचन्द के उपन्यासों को भारतीय ग्रामीण यथार्थ का महाआख्यान रचने
और जातीय जागरण का उदघोष करने वाला पाठ बताया।
उनकी कलात्मक कहानियों की मार्मिकता पर बात करते हुए विवेकानंद मिश्र, ने पूस की रात, सद्गति, ठाकुर का कुंवा और कफ़न को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का समाजशास्त्रीय लेखा जोखा भी है और सामाजिक पतनशीलता के खिलाफ मनुष्यता का जयघोष करने वाली कहानियों के रूप में रेखांखित किया। संवाद कार्यक्रम में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ समीर कुमार पाठक ने प्रेमचन्द को नए ढंग से पढ़ने की बात की । उन्होंने प्रेमचन्द को हिंदी समाज को वैचारिक तार्किकता और सामाजिक तरक्की पर बल देने वाला महत्त्वपूर्ण लेखक बताया। प्रेमचन्द स्मृति यात्रा में विद्यार्थियों के समूह ने उनके पैतृक घर और उनकी स्मृति में स्थापित शोध केंद्र का मुआयना करके प्रेमचन्द सम्बन्धी अकादमिक अध्ययन के विभिन्न संदर्भों को समझने की कोशिश की। हिंदी विभाग की तरफ से डॉ विश्वमौलि ने छात्र छात्राओं को प्रेमचन्द से जुड़ी स्मृतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ है , होरी, सूरदास, मुन्नी, धनिया और बंशीधर जैसे सामान्य जनों के मूल्यबोध को बचाना। इस यात्रा में हिंदी विभाग के पूर्व छात्र उज्ज्वल कुमार सिंह ने सभी छात्रों का मार्गदर्शन किया और जयंती पर आयोजित होने वाले विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबकी सामूहिक प्रतिभागिता सुनिश्चित की। प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर डीएवी पीजी कॉलेज छात्र समूह से लमही में आए विभिन विद्वानों प्रो रामकीर्ति शुक्ल, प्रो वी के शुक्ल, प्रो आफताब अहमद आफ़ाक़ी, डॉ अभय कुमार ठाकुर , प्रो राधेश्याम दुबे, प्रो विजय बहादुर सिंह , प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो लालजी, प्रो ओ एन सिंह के विचारों सुना और सार्थक बातचीत की। डीएवी पीजी कॉलेज की इस अकादमिक यात्रा में विवेकानन्द मिश्र, नीरू, अमरनाथ कुमार, उदय भास्कर, नितीश कुमार, आदर्श पाण्डेय , भास्कर तिवारी, अर्पण क्रिकेट्टा, उदित त्रिपाठी, आदित्य शुक्ल, शिवम शुक्ल,दीपक राय की रचनात्मक भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। सभी छात्र-छात्राओं ने लमही भ्रमण के माध्यम से प्रेमचन्द के साहित्य सरोकार और सांस्कृतिक मूल्य को समझने की कोशिश की और आगामी सत्र में ऐसी यात्राओं की योजना बनाने की अपील की।
आज प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर हिंदी विभाग, डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र समूह द्वारा आयोजित प्रेमचन्द के गांव लमही भ्रमण और प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ विषयक चर्चा में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार राम के नेतृत्व में साहित्य अनुरागी अध्यापकों और विद्यार्थियों के समूह ने प्रेमचन्द की स्मृति में उनके घर और गांव का भ्रमण किया और रचनात्मक सम्वाद के मार्फ़त प्रेमचन्द की महत्ता का स्मरण किया। आज की चर्चा में विद्यार्थियों के समूह ने ग्रामीण जनों से बात करके प्रेमचन्द की साहित्यिक प्रतिछवियों की पड़ताल की और प्रेमचन्द की स्मृति पर सार्थक चर्चा आयोजित की।   चर्चा की शुरुआत करते हुए डीएवी पी जी कॉलेज छात्रअध्ययन समूह छात्रों ने प्रेमचन्द को आज के समय समाज के आलोक में समझने समझाने की जरूरत पर बल दिया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों जनों के साथ कठपुतली नृत्य के माध्यम से प्रेमचन्द की कलात्मक प्रस्तुति का लुत्फ लिया। प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ विषयक चर्चा में सभी विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ राकेश कुमार राम ने कहा कि प्रेमचन्द को याद करना आज के दौर में सामाजिक  विषमता और आर्थिक संकट से जूझ रहे मध्यवर्ग के संघर्ष को याद करना है। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रेमचन्द जातीय उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले लेखक हैं इसलिए उनकी चेतना को आज के संदर्भ में विचार करने की जरूरत है। चर्चा में शामिल उदित त्रिपाठी , आदित्य शुक्ल , दीपक कुमार राय ने प्रेमचन्द के उपन्यासों को भारतीय ग्रामीण यथार्थ का महाआख्यान रचने और जातीय जागरण का उदघोष करने वाला पाठ बताया। उनकी कलात्मक कहानियों की मार्मिकता पर बात करते हुए विवेकानंद मिश्र, ने पूस की रात, सद्गति, ठाकुर का कुंवा और कफ़न को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का समाजशास्त्रीय लेखा जोखा भी है और सामाजिक पतनशीलता के खिलाफ मनुष्यता का जयघोष  करने वाली कहानियों के रूप में रेखांखित किया। संवाद कार्यक्रम में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ समीर कुमार पाठक ने प्रेमचन्द को नए ढंग से पढ़ने की बात की । उन्होंने प्रेमचन्द को हिंदी समाज को वैचारिक तार्किकता और सामाजिक तरक्की पर बल देने वाला महत्त्वपूर्ण लेखक बताया। प्रेमचन्द स्मृति यात्रा में विद्यार्थियों के समूह ने उनके पैतृक घर और उनकी स्मृति में स्थापित शोध केंद्र का मुआयना करकेप्रेमचन्द  सम्बन्धी अकादमिक अध्ययन के विभिन्न संदर्भों को समझने की कोशिश की। हिंदी विभाग की तरफ से डॉ विश्वमौलि ने छात्र छात्राओं को प्रेमचन्द से जुड़ी स्मृतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि प्रेमचन्द को याद करने का अर्थ है , होरी, सूरदास, मुन्नी, धनिया और बंशीधर जैसे सामान्य जनों के मूल्यबोध को बचाना। इस यात्रा में हिंदी विभाग के पूर्व छात्र उज्ज्वल कुमार सिंह ने सभी छात्रों का मार्गदर्शन किया और जयंती पर आयोजित होने वाले विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबकी सामूहिक प्रतिभागिता सुनिश्चित की। प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर डीएवी पीजी कॉलेज छात्र समूह से लमही में आए विभिन विद्वानों प्रो रामकीर्ति शुक्ल, प्रो वी के शुक्ल, प्रो आफताब अहमद आफ़क़ी, डॉ अभव कुमार ठाकुर , प्रो राधेश्याम दुबे, प्रो विनय बहादुर सिंह , प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो लालजी, प्रो ओ एन सिंह के विचारों सुना और सार्थक बातचीत की। डीएवी पीजी कॉलेज की इस अकादमिक यात्रा में विवेकानन्द मिश्र, नीरू, अमरनाथ कुमार, उदय भास्कर, नितीश कुमार, आदर्श पाण्डेय , भास्कर तिवारी, अर्पण क्रिकेट्टा, उदित त्रिपाठी, आदित्य शुक्ल, शिवम शुक्ल,दीपक राय की रचनात्मक भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। सभी छात्र-छात्राओं ने लमही भ्रमण के माध्यम से प्रेमचन्द के साहित्य सरोकार और सांस्कृतिक मूल्य को समझने की कोशिश की और आगामी सत्र में ऐसी यात्राओं की योजना बनाने की अपील की।

पल्लव

डीएवी पीजी काॅलेज के हिन्दी विभाग के छात्र मंच ‘पल्लव‘ के तत्वावधान में गुरूवार को नवांकुर कवियों ने मौलिक कविताओं के जरिये सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष किया, वहीं नारी वेदना को भी काव्यपाठ में उकेरा। आॅनलाइन आयोजित हुए कार्यक्रम में दो दर्जन से अधिक युवा कवियों ने सहभागिता की। छात्र आयुष पाण्डेय ने स्त्री शक्ति पर आधारित ‘हे नारी, तू काली है, तू दूर्गा है, तू नारायणी है, जगदम्बा है, तू इतनी पावन जैसे कृष्णा की मुरली, हे नारी, तू अबला नही सबला है, जैसे झांसी की रानी‘ प्रस्तुत किया। छात्रा गीतांजली यादव ने ‘ पहनावे से आॅकना चरित्र स्त्री का किसने दिया तुम्हे अधिकार इसका ?
पहनावे की बेड़ी लगा कभी बढ़ते कदम को न रोकना‘ सुनाया। निर्मल एहसास ने ‘ हमने अपनी प्यास बंेच दी गीतो को, कब तक दरिया दरिया मारे मारे फिरते…..‘ सुनाया। दुर्गादत्त पाण्डेय ने ‘लाचार नही है नारी, कभी सुना है आपने ? उस देवी के बारे में जो हर वक्त, जिम्मेदारियों तले खुद को, समर्पित किए है‘ आदि हृदयस्पर्शी कविताओं के जरिये सामाजिक व्यवस्था पर टिप्पणी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. राकेश कुमार द्विवेदी ने ‘जिस्म और रूह दोनों किनारें है, जिसमें जीवन के सब तराने है, पानी दुनिया है ये, मंजिल कहाॅ ठिकाना है। रात रूकना है यहाॅ और सुबह चले जाना है‘ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्र विद्या वैभव भारद्वाज ने ‘चिन्ता नही चिन्तन करें, अब खुद को ही दर्पण करें‘ सुनाया। कार्यक्रम संयोजक डाॅ. राकेश कुमार राम ने स्वागत, धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. समीर कुमार पाठक ने दिया। संचालन छात्र विद्या वैभव भारद्वाज एवं राजन कुमार एवं तकनीकी सहयोग उज्ज्वल सिंह ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. अस्मिता तिवारी, वन्दना मिश्रा, रक्षित राज, रवि रंजन, प्रतिक्षित शुभम, द्रविड़ कुमार, अभिजीत कुमार, प्रेम शंकर, दियांशु पाठक आदि ने भी काव्य पाठ किया।