Eco Voice – 2020

Students  of  Department  of  Economics  organized  Eco-Voice  over the pressing issue of  National  Education Policy, 2020. This  student  lead  event  was organized on zoom app on 12th of November 2020. This event was Presided by our Head of Department, Dr. Vimal Shankar Singh. In this event many students came up with their presentation on the issue. One of the students Vinay Kumar Gautam gave his opening presentation  highlighting benefits of the policy. Taking the presentation further Raja Kumar gave critical analysis of the policy which were concerned with conditions of government schools, inadequate number of teachers and related infrastructure of education sector of India. His arguments reflected some striking shortcomings in the policy which remains a problem of affordable education in India.

Saurav Km.Jha and Srijan Srivastava highlighted the importance of retrospective analysis of this policy with the existing one. While highlighting the benefits of the policy of the  government,  Hrithik Singh, one  of  the  participants, pressed over the fact that new education policy is having its striking similarities from Sustainable Development Goals Point 4  that  covers  the  aspect  of  universal  education  and literacy. He also pointed some serious unresolved  issues  concerning  skill development and vocational training initiatives presented in the policy by the government. In the end, our Head of Department Dr. Vimal Shankar Singh gave his concluding remarks where he complemented students for their informative presentations and shared points that need to be kept under consideration while analyzing a policy. He also gave comprehensive brief of the policy and also highlighted its critical aspect. He urged students that these constructive and substantive discussions on issues of national importance must happen as these are beneficial for holistic development of students.


Panel Discussion on Union Budget 20-21

देश के समग्र विकास के लिए कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को एक समान रूप से सहयोग की आवश्यकता है, दोनो एक दूसरे के पूरक तो है ही, पूरे देश की अर्थव्यवस्था इन्ही दोनों के विकास पर टिकी है। उक्त बातें बुधवार को डीएवी पीजी काॅलेज में अर्थशास्त्र विभाग के तत्वावधान में ‘केन्द्रीय बजटः 20-21 की दिशा एवं आयाम‘ विषय पर आयोजित पैनल परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि इण्डियन इण्डस्ट्री एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उद्यमी आर.के चैधरी ने कही। उन्होनें कहा कि आज आवश्यकता है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को सरकार ज्यादा से ज्यादा मजबूत करें तो सम्पूर्ण उद्योग जगत को लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को उद्योगों में नियमों के सरलीकरण की ओर जल्द से जल्द ध्यान देना होगा तभी उद्यमी उत्पादन की ओर ध्यान दे पायेगा। बजट में कराधान व्यवस्था में स्थायी समाधान की बात भी उन्होंने कहा। विशिष्ट वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर भावेश विक्रम सिंह ने कृषि क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आम बजट में कृषि क्षेत्र में किसान संघों की स्थापना एक अच्छी पहल है, लेकिन इस बजट में कृषि क्षेत्र में किये गये अन्य प्रावधान किसानों की आय को आने वाले वर्षो में कम करने वाली होगी जो चिन्ता का विषय है।
विशिष्ट वक्ता एवं नगर के ख्यात चार्टेड एकाउण्टेन्ट जी.डी. दूबे ने सरकार द्वारा किये गये कर प्रावधानों में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि आयकर में शुरू किया गया नया स्लैब आयकर के इतिहास में एक नई परिपाटी है। जीएसटी के प्रावधान अत्यन्त जटिल है, जिसमें सरलीकरण की आवश्यकता ज्यादा महसूस की जा रही है। वहीं उन्होंने कर्मचारियों के सम्बन्ध में बताया कि भविष्य निधि में नियोक्ता के योगदान पर 12 प्रतिशत या फिर 7 लाख तक की रकम को करमुक्त किया गया है, जो पहले पूरी तरह से करमुक्त थी। महिला महाविद्यालय की डाॅ. पद्मिनी रवीन्द्रनाथ ने कहा कि इस बार बजट में पहली बार 150 प्रशिक्षण संस्थान खोलने का प्रावधान किया गया है, जो निश्चित तौर पर से रोजगार सृजन में बड़ा कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में चल रही आर्थिक मन्दी के पीछे कुछ वर्षो में लिए गये कड़े फैसले नही है बल्कि 1991 में शुरू की गयी उदारवादी नीतियाॅ भी उत्तरदायी है।
अध्यक्षता करते हुए स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय बौद्धिक विचार प्रमुख अजय कुमार ने कहा कि जब तक देश का किसान समृद्ध नही होगा तबतक देश के उद्योग धन्धों में भी जान नही आयेगी। भारत में मौजूद युवा शक्ति को बजट के माध्यम से और सशक्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में आर्थिक जनतंत्र की जरूरत है तभी 5 ट्रिलीयन की अर्थव्यवस्था का दृश्य साकार हो पायेगा। पैनल परिचर्चा में विद्वतजनों ने छात्र- छात्राओं की बजट सम्बन्धी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया।
संचालन कार्यक्रम संयोजक डाॅ. अनूप कुमार मिश्रा, स्वागत डाॅ. पारूल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. विमल शंकर सिंह ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. मयंक कुमार सिंह , डाॅ. सौरभ श्रीवास्तव, डाॅ. उर्जस्विता सिंह आदि उपस्थित रहे।