डीएवी पीजी कॉलेज के उर्दू विभाग एवं आई कयू ए सी  के तत्वाधान मे अंतर्राष्ट्रीय उर्दू दिवस के अवसर पर ऑनलाइन ” शाम ए अफसाना” का आयोजन किया गया,जिसमे के एम सी कॉलेज खोपोली(मुम्बईshaam e afsana_urdu_1यूनिवर्सिटी)की हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ सादिका नवाब सहर ने अपनी कहानी मन्नत प्रस्तुत की,बनारस के वरिष्ठ  कहानीकार वसीम हैदर हाश्मी ने “घर वापसी” और डॉ तमन्ना शाहीन ने “मंगरू का भाई” कहानी प्रस्तुत कर समाज पर गहरा वार किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता डी एshaam e afsana_urdu_2वी पी जी कॉलेज के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ मिश्रीलाल ने की।संचालन डॉ तमन्ना शाहीन एवं धन्यवाद ज्ञापन उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ हबीबुल्लाह ने किया।इस अवसर पर डॉ कमालुद्दीन शेख, डॉ अनूप मिश्रा,डॉ सतीश सिंह,डॉ तरु सिंह,डॉ नजमुल हसन,डॉ अस्मिता तिवारी के अतिरिक्त विभिन्न विभागाद्यक्ष,प्राध्यापक एवं छात्र छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।
डीएवी पीजी कॉलेज के उर्दू एवं हिंदी विभाग के तत्वाधान में आजअंतर्राष्ट्रीय उर्दू दिवस के अवसर पर डॉ राकेश द्विवेदी ने कहा कि उर्दू हिंदी सगी बहने हैं,जिस तरह हम हिंदी दिवस मनाते हैं उसी तरह उर्दूAlami_Yaume_Urdu_1 दिवस भी पूरे जोश के साथ मानते हैं, उन्होंने अपनी कविताएं भी सुनाई।डॉ हबीबुल्लाह ने कहा कि उर्दू दुनिया भर में बोली जाने वाली ज़ुबान है,डॉ समीर पाठक ने अल्लामा इक़बाल को याद करते हुए उनकी नज़्म सुनाई,इस अवसर पर डॉ तमन्ना शाहीन एवं डॉ नीलम सिंह ने अपनी नज़्में प्रस्तुत की।कार्यक्रम काAlami_Yaume_Urdu_2 संचालन डॉ तमन्ना शाहीन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अस्मिता तिवारी ने किया।
डीएवी पीजी कॉलेज के उर्दू विभाग में दिनांक 2-4-2018 को एक क्वेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया , जिसमे बी ए तृतीय वर्ष के छात्र कौसर जमाल ने प्रथम,फरहाद नवाज़ ने द्वितीय एवं रेहान अंसारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
डीएवी पीजी कॉलेज वाराणसी के उर्दू विभाग के तत्वधान में 29 फरवरी 2020 को ” उर्दू ज़ुबान की अहमियत और रोज़गार के अवसर” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ मुशर्रफ अली ने कहा कि उर्दू जुबां का आगाज़ 12वीं शताब्दी में हुआ जो आज काफी समृद्ध है,लेकिन उसके लिये इस ज़ुबान को काफी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा है।उर्दू ज़ुबान के कुछ शायर दुनिया भर में मशहूर हैं,ग़ालिब आज की तारीख में सबसे ज़्यादा कोट किये जाने वाले शायर हैं,नज़ीर की नज़्में हिंदुस्तानी तहज़ीब की मिसाल पेश करती हैं।उन्होंने ये भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले बदलाव की झलक भी उर्दू शायरी में देखी जा सकती है।रोज़गार के अवसर पर भी पर्याप्त मौके उपलब्ध हैं,इसके लिये छात्रों को सही गाइडलाइन की आवश्यकता है।इस मौके पर महाविद्यालय के छात्र फरहाद नवाज़ को बी ए (उर्दू)में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर बी एच यू मैडल मिलने पर उर्दू विभाग डीएवी पीजी कॉलेज की ओर से 1000 रूपये की धनराशि देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ शिव बहादुर सिंहने की। अतिथियों का स्वागत डॉ हबीबुल्लाह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ तमन्ना शाहीन ने किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागाद्यक्ष ,प्राध्यापक एवं छात्र- छात्राएँ
उपस्थित रहे।
डीएवी पीजी कॉलेज वाराणसी के उर्दू विभाग के तत्वधान में 19 अप्रैल 2019 बुधवार को “उर्दू सहाफत और उसकी अहमियत ” विषयक एक विशिष्ट व्याख्यान आयोजित हुआ मुख्य वक्ता कशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ क़ासिम अंसारी ने कहा कि सहाफत(पत्रकारिता) एक पवित्र पेशा है।पत्रकार हमेशा सच लिखने का प्रयास करता है जो अत्यधिक मुश्किल काम है,उनहोंने कहा जब हालात काबू से बाहर हो जाते हैं और चारों ओर बुराइयां फ़ैल जाती हैं ऐसी सूरत में अखबार ऐसा जरिया है जो सारी दुनिया को उन हालात से रू बरू कराता है । उर्दू सहाफत ने आज़ादी की लड़ाई में अहम किरदार अदा किया। बदलते समय के साथ इसकी अहमियत बढ़ती जा रही है इस लिये इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ शिव बहादुर सिंह ने की । अतिथियों का स्वागत डॉ हबीबुल्लाह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ तमन्ना शाहीन ने किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागाद्यक्ष ,प्राध्यापक एवं छात्र- छात्राएँ उपस्थित रहे।
डीएवी पीजी कॉलेज के उर्दू विभाग के तत्वाधान में 10 मार्च 2018 ,शनिवार को “इंसानी ज़िन्दगी में अदब की अहमियत” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता कशी हिन्दू विश्व विद्यालय के पूर्व विभागाद्यक्ष प्रोफेसर याक़ूब यावर ने कहा कि अदब दुनिया की किसी भी ज़ुबान में हो उसका असर प्रभावशाली ही होता है।अदब एक ऐसी चीज़ है जो दुनिया की किसी किताब या शब्दकोष से नही सीखा जा सकता इसके लिये शब्दो से ज़्यादा भावनाओ की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की ज़िन्दगी में 80% बातें अनकही ही रह जाती है।ग़ज़ल अदब का एक नमूना ही नहीं बल्कि वह संगम है जिसमे गंगा जमुना तो दिखलाई पड़ती ही हैं,लेकिन सरस्वती की तरह एक तत्व अदृश्य रहता है।कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ शिव बहादुर सिंह ने की।अतिथियों का स्वागत डॉ समीर कुमार पाठक,संचालन डॉ हबीबुल्लाह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ तमन्ना शाहीन ने किया।इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ लल्लन प्रसाद जायसवाल, डॉ विमॉल शंकर सिंह,डॉ मिश्री लाल यादव, डॉ अनूप मिश्रा, डॉ संगीता जैन,डॉ इंद्रजीत मिश्र इत्यादि प्राध्यापक एवं छात्र उपस्थित रहे।
डीएवी पीजी कॉलेज वाराणसी के उर्दू एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वधान में 3 अप्रैल 2018 मंगलवार को विराट कवी सम्मलेन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमे बनारस , ग़ाज़ीपुर और आजमगढ़ के शायरों और कवियों ने एक मंच से एकता ,मुहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया।कार्यक्रम में कवियों एवं शायरों ने लफ़्ज़ों के ज़रिये समाज की परिस्थितियों को श्रोताओं के सम्मुख रखा,कार्यक्रम में गंगा जमुनी तहज़ीब जीवंत हो उठी।शायरों और कवियों में अहमद आज़मी, ओम धीरज,अंशुमान पाठक,आलम बनारसी,शमीम ग़ाज़ीपुरी, भाल चंद्र त्रिपाठी, इशरत जहां और प्रकाश उदय इत्यादि ने अपनी ग़ज़लों और कविताओं के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों पर गहरा वार किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विभागाद्यक्ष प्रो याक़ूब यावर एवं अतिथियों का स्वागत डॉ  हबीबुल्लाह एवं डॉ राकेश कुमार द्विवेदी ने किया।संचालन डॉ लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ तमन्ना शाहीन ने किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागाद्यक्ष , प्राध्यापक एवं छात्र- छात्राएँ
उपस्थित रहे।
जहाँ कविता और शायरी का संगम होता है वहाँ सिर्फ मुहब्बत का पैगाम ही दिखलाई पड़ता है।क़ौमी एकता की झलक दिखाते कवि सम्मलेन सह मुशायरे में डीएवी पीजी कॉलेज के स्व पी एन सिंह स्मृतिसभागार में जब देश भर से आये कवियों और शायरों ने अपनी शायरी पेश की तो समूचे हाल में उपस्थित श्रोता वाह वाह करते रहे।उर्दू एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में बनारस के मशहूर शायर अहमद आज़मी ने मोहब्बत किजिए सबसे यही तो राम कहते हैं, मुहब्बत के इसी पैग़ाम को इस्लाम कहते है और आलम बनारसी ने लाख नफरत का शोर है लेकिन, अब भी दुनिया में प्यार बाक़ी है,सुनाकर गंगाजामुनी तहज़ीब की मिसाल पेश की। प्रयागराज से आये कवि डॉ विनम्र सेन सिंह ने वक़्त,सपने और तूफानों को भला कब रोक पाओगे,चाह कर भी इस समुन्दर को तुम कभी न रोक पाओगे,प्यार करते हो अगर उससे तो ज़ाहिर करो वर्ना ,तुम बताओ दिल की बातों को दिल में कब तक रोक पाओगे सुनाया तो समूचा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। वरिष्ठ शायर प्रोफेसर याक़ूब यावर ने सुन लो हम जैसो को कल हम भी रहे या न रहें,हम वो हैं जिनकी ज़ुबा पे अभी ताले नही है,नवाब बनारसी ने तुम इतनी कोशिशे करके अमानत क्यों दिलाते हो वो क़ातिल है तो क़ातिल को सज़ा से क्यों बचाते हो,प्रयागराज से आये कवि डॉ लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता ने वक़्त की नब्ज़ पर पकड़ रखना ,हाथ में अपने ये हुनर रखना,ख्वाब  दिल में उतर कर नाचेंगे,चाँद की आँख पे नज़र रखना सुनाकर तालियां समेटी।शायरों और कवियों का स्वागत डॉ हबीबुल्ल्लाह एवं राकेश कुमार द्विवेदी ने किया।संचालन डॉ समीर कुमार पाठक,धन्यवाद ज्ञापन राकेश कुमार राम ने किया।इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ अवधेश कुमार मिश्र,डॉ शिव बाहादुर सिंह,डॉ विक्रमदित्य रॉय, डॉ प्रदीप कमल, डॉ लल्लन प्रसाद जयसवाल, डॉ संगीता जैन,डॉ मधु सिसोदिया,डॉ तमन्ना  शाहीन आदि एवं भारी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थ्ति रहे