डीएवी पीजी कालेज के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के तत्वावधान में प्राचीन भारतीय संस्कृति के विविध आयाम विषय पर चौदह दिवसीय ई-कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। कार्यशाला के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में  मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य श्री देवेन्द्र कुमार सिंह थे। श्री सिंह ने कहा कि जय और पराजय के परे भी एक इतिहास है। इतिहास में आरोग्य और अर्थ पर अब ज्यादा प्रकाश डालने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में खान-पान और वनस्पतियों के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यशाला की मुख्य वक्ता कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति विभाग की प्रोफेसर सुष्मिता बासु मजूमदार ने अभिलेखीय पाठ एवं उनके संदर्भ (एपिग्राफिक टेक्स्ट एण्ड देयर कान्टेक्ट्स) विषय पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि यदि अभिलेख नहीं होते तो हमें ढेर सारी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी से वंचित रह जाते। उन्होंने कहा कि अभिलेखांें से तीन बातें महत्वपूर्ण रूप से ज्ञात होती है- अभिलेख का स्थान, उसका विषय एवं भाषा तथा लिपि। उन्होनें साहगौरा, महास्थान ओर विशेष रूप से आशोक के अभिलेखों की विस्तृत व्याख्या की तथा उनके आधार पर अशोक क साम्राज्य सीमा का निर्धारण किया। कार्यक्रम का संचालन तथा स्वागत विभागाध्यक्ष डा0 प्रशान्त कश्यप तथा धन्यवाद ज्ञापन डा0 मुकेश कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर डा0 सीमा, डा0 ओम प्रकाश कुमार सहित अन्य विभागों एवं संस्थाओं के शिक्षकगण डा0 विनय कुमार, डा0 सचिन कुमार तिवारी, डा0 उमेश कुमार सिंह, डा0 नैरंजना श्रीवास्तव, डा0 संजय सिंह, डा0 शोभनाथ पाठक, डा0 समीर पाठक एवं अन्य विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के प्रतिभागीगण जुड़े रहे।