अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डीएवी पीजी काॅलेज के स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ के तत्वावधान में सोमवार को ‘महिला नेतृत्व‘ पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की वरिष्ठ इतिहासविद प्रो. बिन्दा परांजपे ने कहा कि भारतवर्ष में अनादि काल से ही स्त्रियों मंे नेतृत्व का कौशल रहा है, कस्तूरबा गांधी, सावित्री बाई फूले, एनी बेसेन्ट, माॅ आनन्दमयी जैसी सशक्त स्त्रियों की श्रृंखला रही है, लेकिन समाज कभी इन्हें उनके कृतियों से याद नही कर पाता जो दुःख का विषय है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्त्री और पुरूष के बीच समानता उन्नत समाज के लिए अत्यन्त आवश्यक है। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डाॅ. सत्यदेव सिंह ने कहा कि देश को दिशा दिखाने वाले गांधी तो सबको याद है लेकिन गांधी को सदैव प्रेरित करने वाली कस्तूरबा को भी हमें याद रखना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने अन्दर एक साकारात्मक सोच विकसित करनी होगी जिससे कथनी और करनी के बीच का फर्क करना होगा।
महिला दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. बिन्दा परांजपे ने स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ की ई न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के अध्यापकों द्वारा काव्य पाठ भी किया गया।

डाॅ. कमालुद्दीन शेख ने ‘घुस कर काॅटों में एक तितली पकड़ी है, कैद में रखकर जी बहलाना ठीक नही‘ सुनाया तो डाॅ. अनूप मिश्र ने ‘अर्धनारीश्वर ही मेरा भगवान‘ सुनाया। डाॅ. प्रतिभा मिश्रा ने ‘नारी तुम स्वतंत्र हो‘, डाॅ. संगीता जैन ने ‘छू लो मुझे, पा लो मुझे‘, डाॅ. पूनम सिंह ने ‘क्या पुरूष सिर्फ छलना मात्र है‘ सुनाया। डाॅ. सुषमा मिश्रा, डाॅ. हसन बानो, डाॅ. महिमा सिंह आदि ने भी कविता पाठ किया। संचालन कार्यक्रम संयोजिका डाॅ. स्वाति सुचरिता नन्दा ने किया। स्वागत प्रो. शिव बहादुर सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. ऋचारानी यादव ने दिया। इस अवसर पर स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ के समस्त सदस्य एवं अध्यापक उपस्थित रहे।

वहीं आईक्यूएसी के तत्वावधान में ग्रीवांस एण्ड रिड्रेसल कमेटी द्वारा आयोजित आॅनलाइन व्याख्यान श्रृंखला में सोमवार को डाॅ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की प्रो. कुसुम त्रिपाठी एवं काशी हिन्दू विवि की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. किंग्सन सिंह पटेल का व्याख्यान हुआ। संयोजन डाॅ. ऋचारानी यादव ने किया।