DAV Post Graduate College

Maharshi Dayanand Vidhyalaya

Maharshi Dayanand Marg, Narharpura, Ausanganj, Varanasi U.P.
ॐ भूर्भूवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धिमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ

National Seminar on India Neighbourhood Policy - 2019

 
 
 
Day 1 :-
 
 
भारत के पड़ोसी देशों ने कभी भी यहाॅ की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहमति नहीं जताई क्योंकि पड़ोसी देश खासतौर से पाकिस्तान जो सदैव से सैन्य शासन के प्रभाव में रहा है वह लोकतंत्र से कभी सहमत नही हो सकता। उक्त बातें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेन्टर फार साउथ एशियन स्टडी, नई दिल्ली के चैयरमैन प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने गुरुवार को कॉलेज में आयोजित ‘‘भारत की पड़ोस नीति, गतिशीलता, चुनौतियाॅ एवं संभावनाएॅ‘‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता कही। राजनीति शास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने कहा कि पड़ोसी देश अब भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखने लगे हैं क्योंकि हाल के दिनों में कई ऐसे मौके आए हैं जब भारत ने बिना किसी भेदभाव के पड़ोसियों को संकटकाल में मदद को हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर कभी भी पड़ोसी देशों के साथ नीतियां ना बन सकती हैं और ना चल सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है, इसी मजबूत अमेरिका ने भारत से परमाणु समझौता करने के लिए सन् 2005 में अपने संविधान में संशोधन किया जबकि भारत ने 1947 से लेकर 2019 तक अमेरिका को लेकर अपनी विदेश नीति में तनिक भी बदलाव नहीं किया।
संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता नई दिल्ली से आए विदेश नीति के जानकार प्रोफेसर मधुरेंद्र कुमार ने कहा कि कि आज पड़ोसी देशों के साथ ऐसे रिश्ते की आवश्यकता है जिससे समेकित विकास की संकल्पना विकसित हो सके। साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ चल रही विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक शक्ति ही दुनिया में उसे सिरमौर बनाने के लिए प्रेरित करती है। नई दिल्ली से आई समत एस पटनायक ने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों को चीन बड़ी मात्रा में हथियारों की सप्लाई करता है जो भारत के लिए एक चुनौती है इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. अरूण श्रीवास्तव ने किया। 
 संगोष्ठी का संचालन प्रियंका सिंह, स्वागत डाॅ. शिव बहादुर सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. स्वाती सुचरिता नन्दा ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. मधु सिसौदिया, डाॅ. राकेश कुमार द्विवेदी, डाॅ. समीर पाठक, डाॅ. मुकेश कुमार सिंह, डाॅ. प्रतिमा गुप्ता, डाॅ. अरविन्द वर्मा आदि उपस्थित रहे।
 
 
 
 
Day 2 :-
 
 चीन एशिया की बड़ी महाशक्ति बनने के लिए भारत को पाकिस्तान के मसलों में उलझाये रखना चाहता है। यह कहना है विदेश मामलों के जानकार एवं किंग्स काॅलेज, लन्दन के प्रोफेसर हर्ष वी. पन्त का, जो शुक्रवार ़को  कॉलेज में आयोजित ‘‘भारत की पड़ोस नीति, गतिशीलता, चुनौतियाॅ एवं संभावनाएॅ‘‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अन्तिम दिन बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। राजनीति शास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में प्रोफेसर पन्त ने कहा कि भारत पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधरना काफी कठिन है, चूॅकि पाकिस्तान आतंकवाद पर अपनी लचर नीति को स्वीकार करने से सदैव इनकार करता रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत दक्षिण पूर्व एशिया से आगे निकलकर वैश्विक स्तर पर महाशक्ति बनने की दिशा में बढ़े। इसके लिए उसे अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और राजनैतिक रिश्ते बढ़ाने होंगे। 
विशिष्ट वक्ता नई दिल्ली से आये डाॅ. श्रीराम चैलिया ने एक मुद्रा पर बल देते हुए कहा कि यूरोपीय यूनियन की तरह दक्षिण एशिया की भी एक मुद्रा होनी चाहिए तभी वहाॅ के देशों का एक साथ विकास हो सकेगा। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तेज प्रताप सिंह ने कहा कि दक्षिण एशियाई संगठनों में एकता की कमी ही यहाॅ के पिछड़ेपन की वजह है, यदि यहाॅ के देश एक साथ आये तो वह किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सक्षम है। प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सार्क संगठन पूरी तरह से असफल हो चुका है। जिसकी खास वजह भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद है। अध्यक्षता डाॅ. मधुरेन्द्र कुमार ने किया। 
संगोष्ठी का संचालन डाॅ. स्वाती सुचरिता नन्दा, स्वागत विभागाध्यक्ष डाॅ. अरूण श्रीवास्तव,धन्यवाद ज्ञापन प्रियंका सिंह ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. अवधेश कुमार मिश्रा, डाॅ. शिव बहादुर सिंह, डाॅ. हरिश्चन्द्र यादव, डाॅ. राकेश द्विवेदी, डाॅ. पूनम सिंह, डाॅ. प्रतिमा गुप्ता, डाॅ. अरविन्द वर्मा, डाॅ. महिमा सिंह, गौरव मिश्रा आदि उपस्थित रहे। 
 
 

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